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EPFO ऑफिस अब पासपोर्ट सेवा केंद्रों जैसे बनेंगे: किसी भी शहर के दफ्तर में सुलझेंगे पीएफ विवाद; मार्च 2026 तक 100 करोड़ लोगों को कवर करने का लक्ष्य

Subhash Dhayal

Published on: 26 December, 2025

केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री मनसुख मांडविया ने शुक्रवार को कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के कामकाज में बड़े बदलावों का ऐलान किया है। अब देश के सभी ईपीएफओ ऑफिसों को पासपोर्ट सेवा केंद्रों की तर्ज पर ‘सिंगल-विंडो सर्विस सेंटर’ में बदला जाएगा। इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि पीएफ खाताधारक देश के किसी भी क्षेत्रीय कार्यालय यानी रीजनल ऑफिस में जाकर अपनी समस्याओं का समाधान करवा सकेंगे। अब उन्हें उस खास ऑफिस के चक्कर नहीं काटने होंगे, जहां उनका पीएफ खाता रजिस्टर्ड है। दिल्ली में पायलट प्रोजेक्ट शुरू, अब ऑफिस की बंदिश खत्म होगी गुजरात के वटवा में ईपीएफओ के नए ‘भविष्य निधि भवन’ के उद्घाटन के दौरान मंत्री मांडविया ने बताया कि इस नई व्यवस्था का ट्रायल दिल्ली में शुरू हो चुका है। पहले नियम यह था कि कर्मचारी को अपनी शिकायतों या दावों के लिए उसी क्षेत्रीय कार्यालय जाना पड़ता था, जिससे उसका संस्थान जुड़ा होता था। अब मॉडर्न टेक्नोलॉजी की मदद से इसे पूरी तरह डिजिटल और कनेक्टेड बनाया जा रहा है, ताकि किसी भी शहर का व्यक्ति नजदीकी ईपीएफओ ऑफिस जाकर अपना काम करा सके। ‘ईपीएफ सुविधा प्रोवाइडर’ करेंगे वर्कर्स की मदद सरकार जल्द ही ‘ईपीएफ सुविधा प्रोवाइडर’ का नया मैकेनिज्म लॉन्च करेगी। ये अधिकृत फैसिलिटेटर होंगे, जो उन कर्मचारियों की मदद करेंगे जिन्हें डिजिटल सिस्टम चलाने में दिक्कत आती है या जो पहली बार पीएफ से जुड़ रहे हैं। ये सुविधा प्रोवाइडर नागरिकों और ईपीएफओ के बीच एक पुल की तरह काम करेंगे और दावों यानी क्लेम्स के निपटारे में गाइड करेंगे। इनऑपरेटिव अकाउंट्स के लिए चलेगा मिशन मोड केवाईसी देश के लाखों कर्मचारियों का पैसा ऐसे ईपीएफ खातों में फंसा है, जो सालों से बंद या इनऑपरेटिव पड़े हैं। मंत्री ने कहा कि ईपीएफओ अब इन खातों के लिए ‘मिशन मोड’ में केवाईसी वेरिफिकेशन करेगा। इसके लिए एक डेडिकेटेड डिजिटल प्लेटफॉर्म लॉन्च किया जाएगा। इससे उन खाताधारकों या उनके वारिसों की पहचान कर उन्हें हक का पैसा सुरक्षित तरीके से लौटाया जा सकेगा। विदेश से लौटने पर भी नहीं डूबेगा पीएफ का पैसा भारत अब अपने मुक्त व्यापार समझौतों (FTAs) में सोशल सिक्योरिटी क्लॉज को भी शामिल कर रहा है। मांडविया ने बताया कि भारत-यूके समझौते की तरह अब अन्य देशों के साथ होने वाली डील में भी यह प्रावधान होगा कि अगर कोई भारतीय कर्मचारी विदेश में काम करके लौटता है, तो उसका वहां जमा पीएफ कंट्रीब्यूशन बेकार नहीं जाएगा। वह भारत लौटने पर भी अपनी जमा राशि और अन्य सुविधाओं का लाभ ले सकेगा। 28 लाख करोड़ का फंड और सरकारी गारंटी मंत्री ने ईपीएफओ की मजबूती का हवाला देते हुए कहा कि वर्तमान में संगठन के पास 28 लाख करोड़ रुपए का फंड कॉर्पस है और यह 8.25% की दर से सालाना ब्याज दे रहा है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि ईपीएफओ में जमा पैसा पूरी तरह सुरक्षित है क्योंकि इसके साथ भारत सरकार की गारंटी जुड़ी हुई है। 2026 तक 100 करोड़ लोगों को सोशल सिक्योरिटी का लक्ष्य मांडविया ने आंकड़ों के जरिए बताया कि 2014 से पहले भारत में केवल 19% आबादी को सोशल सिक्योरिटी (सामाजिक सुरक्षा) कवर मिलता था, जो अब बढ़कर 64% हो गया है। उन्होंने कहा, “आज देश के 94 करोड़ लोग किसी न किसी रूप में सामाजिक सुरक्षा के दायरे में हैं। चीन के बाद भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा देश है। हमारा लक्ष्य है कि मार्च 2026 तक देश के 100 करोड़ नागरिकों को इसके तहत कवर किया जाए।” आपके लिए क्या-क्या बदलेगा ?

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