भारत की 5 ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी बनने की जर्नी में जहां ग्रॉस डोमेस्टिक प्रोडक्ट यानी GDP ग्रोथ एक अहम पहलु है। साथ ही लोगों का वित्तीय रूप से मजबूत होना भी उतना ही जरूरी है। कोई अनएक्सपेक्टेड इवेंट यानी घटना कभी भी फाइनेंशियल संकट खड़ा कर सकती है। इससे विकास की यह यात्रा बेपटरी हो सकती है। ज्यूरिख कोटक जनरल इंश्योरेंस के MD और CEO आलोक अग्रवाल का कहना है कि इंश्योरेंस में बड़ा प्रोटेक्शन गैप भारत की फाइनेंशियल स्टेबिलिटी के लिए एक चुनौती है। इंश्योरेंस कवरेज में एक बड़ा गैप देश की आर्थिक मजबूती की राह में एक बड़ी रुकावट बन सकता है। बेशक फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स को लेकर अब लोगों में जागरूकता तेजी से बढ़ रही है। लेकिन अब भी बड़े पैमाने पर लोग इंश्योरेंस से वंचित हैं। खासतौर पर लाइफ, हेल्थ और क्लाइमेट रिस्क या सीजन चेंजेंस से जुड़े जोखिम को लेकर। इंश्योरेंस कंपनियां इन सभी पर सिक्योरिटी कवर देकर मौजूदा समय में अंतर को भरने में अहम भूमिका निभा सकती हैं। देश की GDP में इंश्योरेंस प्रीमियम की हिस्सेदारी सिर्फ 3.7% इंश्योरेंस रेगुलेटरी डेवलपमेंट अथॉरिटी (IRDAI) ने 2047 तक ‘सबके लिए इंश्योरेंस’ का टारगेट रखा है। देश में इंश्योरेंस सेक्टर पिछले दो सालों में घरेलू बाजार में 17% CAGR की दर से बढ़ रहा है। लेकिन आंकड़े बताते हैं कि वित्तीय वर्ष 2024 में देश की GDP में प्रीमियम की हिस्सेदारी सिर्फ 3.7% है। इससे साफ है कि देश की एक बड़ी आबादी इंश्योरेंस सर्विसेज से वंचित है। इससे अहम बात यह है कि इंश्योरेंस प्रोडक्ट्स को लेकर एक बड़ी आबादी के पास पर्याप्त समझ का अभाव है। ये तबका इंश्योरेंस को वित्तीय संकट से बचाने वाले सुरक्षा कवर की जगह टैक्स सेविंग इंस्ट्रूमेंट या निवेश का प्रोडक्ट मानते हैं। जनरल इंश्योरेंस वित्तीय मजबूती को बढ़ावा देने के लिए जरूरी समझ की इस कमी के गंभीर परिणाम सामने आए हैं। जैसे हेल्थ कवर न होने से परिवारों का सारा पैसा हेल्थ पर खर्च हो जाना, खराब मौसम की वजह से किसानों का नुकसान झेलना और शहरी परिवारों का दुर्घटनाओं और संपत्ति के नुकसान के प्रति असुरक्षित होना। कई स्तर पर बीमा कवरेज न होने की वजह से वित्तीय स्थिरता का संतुलन डगमगा रहा है। ऐसे समय में जनरल इंश्योरेंस वित्तीय मजबूती को बढ़ावा देने का एक जरूरी साधन बन जाता है। जनरल इंश्योरेंस प्रोडक्ट्स फाइनेंशियल सिक्योरिटी लाने में कितने मददगार हैं, इसकी जागरुकता फैलाना आज का सबसे जरूरी कदम हो सकता है। प्रोडक्ट्स और उससे इतर, जागरूकता और भरोसे को बनाना हमेशा की तरह लाइफ और हेल्थ इंश्योरेंस को प्रायोरिटी मिलती है। हालांकि, जनरल इंश्योरेंस जैसे मोटर, होम, फसल और जलवायु-जोखिम बीमा की भी भूमिका उतनी ही अहम है। उदाहरण के लिए ऋतु और मौसम-आधारित फसल बीमा योजनाएं भारत के किसानों के बीच वित्तीय मजबूती का निर्माण कर सकती हैं। किसी भी खराब मौसम की स्थिति में एक बीमा पॉलिसी उन्हें क्षतिग्रस्त फसलों से होने वाले वित्तीय नुकसान से उबरने में मदद कर सकती है। इसी तरह घर का बीमा किसी व्यक्ति को अचानक बेघर होने पर अपने जीवन को फिर से बनाने में मददगार साबित हो सकता है। बीमा कंपनियां लगातार नए-नए प्रोडक्ट्स लाने पर फोकस कर रही हैं, लेकिन अब उन्हें चाहिए कि वे जागरूकता लाने और भरोसा बनाने पर भी ध्यान दें। खासतौर पर कस्बों और देहातों में जहां बीमा की सेवाएं बेहद कम आबादी तक ही पहुंच पाई हैं। इन समुदायों के बीच बीमा को सहज बनाने के लिए सतत और सामूहिक प्रयासों की जरूरत है। ये प्रयास इस तरह हो सकते हैं:- बीमा इंडस्ट्री से जुड़ी कंपनियों के प्रयासों से जागरूकता आएगी भारत में फाइनेंशियल स्टेबिलिटी लाने के लिए सरकारी और निजी बीमा कंपनियों के साथ अन्य सभी हितधारकों को एकजुट होकर काम करने की जरूरत है। शिक्षा और जागरूकता इसके लिए सबसे अहम हैं। हमें वित्तीय साक्षरता को बढ़ावा देने के लिए फिनटेक, एग्रीटेक, स्वयं सहायता समूहों, एमएसएमई और शिक्षण संस्थानों के बीच अधिक से अधिक साझेदारी स्थापित करनी होगी। ताकि लोगों तक बीमा की जानकारी पहुंच सके। भारत का सुरक्षा कवर का अंतर, चुनौती के साथ अवसर भी है भारत का सुरक्षा कवर का यह अंतर केवल एक आंकड़ा नहीं, यह चुनौती के साथ अवसर भी है। चुनौती लोगों को यह समझना है कि आर्थिक मजबूती उन्हें आगे बढ़ने, समृद्ध और सफल होने का अवसर देती है। जैसे- हम एक मजबूत वित्तीय व्यवस्था बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं, तो वित्तीय सुरक्षा प्रदान करने में बीमा कंपनियों की भूमिका और अहम होती जाएगी। चुनौती के लिए भारत की जनरल इंश्योरेंस कंपनियां पूरी तरह तैयार इस चुनौती के लिए भारत की सामान्य बीमा कंपनियां पूरी तरह से तैयार हैं। वे डिजिटल-फर्स्ट स्ट्रेटेजी और कस्टमर एजुकेशन कैंपेन के जरिए लोगों को सही फैसले लेने में मदद कर रही है। इसके जरिए कंपनियां यह सुनिश्चित कर रहीं हैं कि हर भारतीय, चाहे वह किसी भी जगह रहता हो या उसकी आय कितनी भी हो, उसे बीमा सुरक्षा किफायती दरों पर मिल सके।
[rank_math_breadcrumb]
भारत की GDP में इंश्योरेंस प्रीमियम की सिर्फ 3.7% हिस्सेदारी: जनरल इंश्योरेंस से फाइनेंशियल सिक्योरिटी मिलेगी, 2047 तक सबको कवर करने का टारगेट
Subhash Dhayal
Published on: 07 December, 2025
Join our WhatsApp Channel
खबरें और भी हैं...









