सरकार ने आधार के तकनीकी ढांचे में बड़े बदलाव की तैयारी शुरू कर दी है। ‘आधार विजन 2032’ दस्तावेज तैयार हो गया है। इसमें एआई, क्लाउड कंप्यूटिंग, ब्लॉकचेन और क्वांटम कंप्यूटिंग जैसी तकनीकों को अपनाने की सिफारिश की गई है। मकसद आधार को तेज, सुरक्षित और फ्रॉड-फ्री बनाना है। नई व्यवस्था में फिंगरप्रिंट की जगह फेशियल रिकग्निशन प्राथमिक माध्यम होगा। आधार के सीईओ भुवनेश कुमार ने कहा कि विजन 2032 का लक्ष्य है, लेकिन तैयारी उससे आगे की तकनीक को ध्यान में रखकर हो रही है। एआई और क्वांटम कंप्यूटिंग से तकनीकी परिदृश्य तेजी से बदल रहा है। तीन प्रमुख बदलाव… तकनीकी ढांचे की तैयारी समिति का प्रारूप अगले महीने अंतिम रूप देगा। मार्च में इसे यूआईडीएआई को सौंपा जाएगा। इसके अनुसार अगले पांच साल के लिए आधार का नया तकनीकी ढांचा तैयार होगा। मौजूदा अनुबंध 2027 में समाप्त होगा। 2032 तक के लिए नया अनुबंध किया जाएगा। यह दस्तावेज बनाने के लिए पिछले साल अक्टूबर में यूआईडीएआई के चेयरमैन नीलकांत मिश्रा की अध्यक्षता में समिति बनाई गई थी। इसमें सर्वम् एआई के सह-संस्थापक विवेक राघवन, न्यूटनिक्स के संस्थापक धीरज पांडेय, अमृता यूनिवर्सिटी के डॉ. पी. पूर्णचंद्रन, मिशिगन स्टेट यूनिवर्सिटी के प्रो. अनिल जैन और आईआईटी जोधपुर के मयंक वत्स शामिल थे। ———— ये खबर भी पढ़ें… वॉट्सएप के एंड-टू-एंड एनक्रिप्शन पर सवाल:मुकदमे में दावा- मेटा आपकी प्राइवेट चैट्स देख सकता है; कंपनी ने आरोपों को फर्जी बताया दुनिया के सबसे पॉपुलर मैसेजिंग एप वॉट्सएप की पेरेंट कंपनी मेटा एक बार फिर प्राइवेसी को लेकर आरोपों के घेरे में है। सैन फ्रांसिस्को की एक फेडरल कोर्ट में दायर नए मुकदमे में दावा किया गया है कि कंपनी यूजर्स के उन चैट्स को भी देख सकती है, जिन्हें वह एंड-टू-एंड एनक्रिप्टेड (E2E) बताकर पूरी तरह सुरक्षित होने का दावा करती है। पूरी खबर पढ़ें…
[rank_math_breadcrumb]
आधार में फिंगरप्रिंट की जगह चेहरे से पहचान की तैयारी: हर महीने 100 करोड़ ऑथेंटिकेशन का टारगेट, AI और क्वांटम तकनीक से सुरक्षा बढ़ेगी
Subhash Dhayal
Published on: 26 January, 2026
Join our WhatsApp Channel
खबरें और भी हैं...









